जबलपुर। राज्य में उपभोक्ता आयोगों में बड़े पैमाने पर खाली पदों को लेकर मप्र हाईकोर्ट ने सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि “यदि सरकार खाली पदों पर नियुक्ति नहीं कर पा रही है, तो उपभोक्ता फोरम बंद क्यों नहीं कर देती?” बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव को 24 मार्च 2026 को दोपहर 2:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने दाखिल की है अपील
डिवीजन बेंच राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और राज्य उपभोक्ता आयोग की अपील पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल, दमोह जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष ऋषभ कुमार सिंघल की याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस विशाल धगट) ने 16 जनवरी 2026 को आदेश दिया था कि नई नियुक्ति होने तक उन्हें रिटायरमेंट के बाद भी पद पर कार्य करने दिया जाए। सरकार ने अपील में तर्क दिया कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी कर्मचारी को पद पर बनाए नहीं रखा जा सकता, इसलिए सिंगल बेंच का आदेश निरस्त किया जाए।
अदालत की नाराजगी क्यों?
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अध्यक्ष व सदस्यों की योग्यता संबंधी अधिसूचना जारी नहीं होने से नियुक्तियां लंबित हैं। इस पर बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब फोरम में कोरम पूरा नहीं होगा, सुनवाई नहीं होगी, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाएंगे?
कहां कितने पद खाली?
जिला उपभोक्ता फोरम: 102 में से 35 सदस्य पद खाली
51 में से केवल 19 फोरम कार्यरत
17 फोरम पूरी तरह बंद
अदालत ने टिप्पणी की कि यदि सरकार नियुक्तियां नहीं कर पा रही है तो “इस कॉन्सेप्ट को ही समाप्त कर देने” पर विचार करना चाहिए।
क्यों अहम है यह मामला?
उपभोक्ता आयोग आम नागरिकों को सस्ता और त्वरित न्याय देने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। यदि बड़ी संख्या में फोरम बंद रहेंगे तो उपभोक्ता विवादों की सुनवाई ठप हो जाएगी और लंबित मामलों का बोझ बढ़ता जाएगा। यह मामला अब 24 मार्च को महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है, जब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं कोर्ट के सामने जवाब देंगे।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WA-379-2026
