LAW'S VERDICT

हलफनामा नहीं, चुनाव लड़ने जरूरी है सक्षम प्राधिकारी का जाति प्रमाणपत्र

 


सिवनी के जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी छीनने के खिलाफ ब्रजेश सिंह की अपील हाईकोर्ट से खारिज 

जबलपुर। अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट से बिना वैध जाति प्रमाणपत्र के चुनाव लड़ना सिवनी के जिला पंचायत सदस्य ब्रजेश सिंह को महंगा पड़ गया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने साफ कहा - “चुनाव लड़ने के सिर्फ हलफनामा दे देना काफी नहीं  है। नामांकन के साथ सक्षम प्राधिकारी का जाति प्रमाणपत्र  होना अनिवार्य है।” इसी आधार पर ज़िला पंचायत, सिवनी के सदस्य पद पर ब्रजेश सिंह का चुनाव निरस्त करने का आदेश बरकरार रखा गया और उसकी ओर से दाखिल अपील खारिज कर दी गई।

SC वर्ग से नाता नहीं, फिर भी लड़ा चुनाव 

राम प्रसाद डहेरिया की ओर से दाखिल की गई चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचित सदस्य ब्रजेश सिंह SC वर्ग से संबंधित नहीं हैं। उन्होंने नामांकन पत्र में जाति प्रमाण पत्र नहीं लगाया। चूंकि ब्रजेश सिंह SC वर्ग के नहीं हैं, इसलिए उनका निर्वाचन अवैध है। 16 नवंबर 2023 को निर्वाचन ट्रिब्यूनल (कमिश्नर, जबलपुर संभाग) ने सिंह का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। सिंगल जज ने भी 28 दिसंबर 2023 को राहत देने से इनकार कर दिया। अब डिवीजन बेंच ने भी अपील खारिज कर दी।

खुद की घोषणा काफी नहीं 

अदालत ने माना कि अपीलकर्ता के पास आज तक SC का वैध जाति प्रमाणपत्र नहीं है। स्वयं की घोषणा (Self Declaration) से आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ना वैध नहीं होता। जाति का प्रमाण केवल अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र से ही सिद्ध होगा। अदालत ने कहा कि जब मूल योग्यता ही मौजूद नहीं है, तो साक्ष्य और मुद्दों की जरूरत नहीं बचती। बिना प्रमाणपत्र के आरक्षित सीट पर कोई भी दावा टिक नहीं सकता।  डिवीज़न बेंच ने रिट अपील खारिज करके ब्रजेश सिंह का चुनाव निरस्त करने का आदेश बरकरार रखकर SC सीट पर दोबारा चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है।  

हाईकोर्ट का आदेश देखें WA-39-2024

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