LAW'S VERDICT

सरकारी ज़मीन की बावड़ियों को बेचने पर हाईकोर्ट ने दिखाया कड़ा रुख

जनहित याचिका पर दिए यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश, नोटिस जारी 

इंदौर।  सरकारी भूमि पर स्थित ऐतिहासिक बावड़ियों (जलाशयों) को निजी हाथों में बेचे जाने की आशंका को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। याचिका pro bono publico (सार्वजनिक हित) में दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो ये पारंपरिक जल स्रोत समाप्त हो सकते हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया है कि जिन बावड़ियों (कुओं) को लेकर विवाद है, उनकी वर्तमान स्थिति (status quo) को बनाए रखा जाए। यानी फिलहाल न तो उन्हें बेचा जा सकेगा और न ही उनके स्वरूप में कोई बदलाव किया जा सकेगा। हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश जल संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि सरकार व्यापक नीति बनाती है, तो प्रदेशभर में सैकड़ों परंपरागत जल स्रोतों को नया जीवन मिल सकता है।

याचिका में कहा- खतरे में हैं बावड़ियां 

याचिकाकर्ता संदीप मिश्रा (इंदौर) की ओर से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि सरकार की जमीन पर स्थित कई बावड़ियां निजी व्यक्तियों को बेचे जाने की प्रक्रिया में हैं या उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की परंपरागत व्यवस्था भी खत्म हो सकती है।

जलाशयों के संरक्षण के दिए थे निर्देश 

सुनवाई के दौरान डिवीज़न बेंच ने पाया कि जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़ी एक अन्य जनहित याचिका पहले से विचाराधीन है। उस मामले में कोर्ट पहले ही नोटिस जारी कर चुका है। साथ ही  हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया था कि वे सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों की बैठक बुलाकर जलाशयों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए ठोस नीति तैयार करें।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

वर्तमान याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश देकर डिवीज़न बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अनावेदकों को जवाब देने चार सप्ताह का समय दिया गया है। 

हाईकोर्ट का आदेश देखें  WP-2826-2026

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