LAW'S VERDICT

प्रमोशन में आरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

2025 के नियमों को चुनौती देने वाली 3 दर्जन से अधिक याचिकाओं पर बहस समाप्त

जबलपुर। वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए प्रमोशन में आरक्षण संबंधी नियमों को चुनौती देने वाली तीन दर्जन से अधिक याचिकाओं पर Madhya Pradesh High Court में मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। मामलों की आखिरी सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। राज्य सरकार की ओर से अंतिम दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

प्रमोशन के नियमों पर उठाये हैं सवाल 

भोपाल की वेटरनरी सर्जन Dr. Swati Tiwari व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया है कि प्रमोशन में आरक्षण लागू करने से पहले आवश्यक आंकड़ों का संग्रह, संबंधित वर्गों के प्रतिनिधित्व का विश्लेषण, प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency) का आकलन करना अनिवार्य है। नए नियम इन संवैधानिक और न्यायिक मानकों का पालन नहीं करते। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नियम संविधान के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

सरकार की ओर से रखीं गेन अंतिम दलीलें 

मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अंतिम दलीलें पेश कीं। सरकार का कहना था कि नए नियम संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक संतुलन और उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

आखिरी मौके पर हस्तक्षेप से इनकार

सुनवाई के अंतिम चरण में एक पक्षकार ने डिवीजन बेंच से हस्तक्षेप की अनुमति मांगी। बेंच ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि मामला अंतिम दौर में है और अब हस्तक्षेप की अनुमति देना केस को पुनः खोलने जैसा होगा, जो उचित नहीं है। सभी पक्षों की विस्तृत बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इस मामले का फैसला प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण की नीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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