13 नर्सिंग ऑफिसरों की याचिका पर अंतरिम आदेश, राज्य सरकार को नोटिस; अगली सुनवाई 18 मार्च को
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पदों पर की जा रही सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 13 नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।
2024 की अधिसूचना को चुनौती
जबलपुर की निशा चंदेल सहित 13 नर्सिंग ऑफिसरों ने 21 मार्च 2024 की राजपत्र अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1989 के नियमों के तहत सिस्टर ट्यूटर के 90 प्रतिशत पद पदोन्नति से और 10 प्रतिशत पद प्रत्यक्ष भर्ती से भरे जाते थे। वर्ष 2011 के संशोधन में भी यही व्यवस्था लागू थी।
भर्ती नियमों में बदलाव का आरोप
याचिकाकर्ताओं के अनुसार 21 मार्च 2024 की अधिसूचना के माध्यम से नियमों में संशोधन कर 90 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती से और 10 प्रतिशत पदों को पदोन्नति से भरने का प्रावधान कर दिया गया। इसके अलावा 25 दिसंबर 2025 को जारी संशोधित विज्ञापन के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पदों पर प्रत्यक्ष भर्ती की जा रही है, जबकि नियमों के अनुसार इन पदों को पदोन्नति से भरा जाना चाहिए था।
प्रमोशन पर असर की दलील
याचिकाकर्ता वर्तमान में इन-चार्ज सिस्टर ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि वे वर्ष 2010 से 2014 के बीच स्टाफ नर्स यानी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त हुई थीं, जो सिस्टर ट्यूटर पद का फीडर कैडर है। नई व्यवस्था लागू होने से उनके पूरे सेवाकाल में पदोन्नति की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी, जो सेवा नियमों के विपरीत और अवैधानिक है।
सुनवाई में क्या हुआ
मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
