जबलपुर। बुरहानपुर के जंगलों में सक्रीय ‘गोंद माफिया पर लगे बैन का सख्ती से हो पालन, ऐसा न करने वालों पर करेंगे कड़ी कार्रवाई’। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस सख्त निर्देश के साथ बुधवार को बुरहानपुर के जंगलों में पेड़ों पर हो रहे अत्याचार पर गंभीर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस संजिव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सालाई और धावड़ा पेड़ों से गोंद निकालने पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है, इसके बावजूद गतिविधियां जारी हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है।
बेंच ने निर्देश दिए हैं कि बैन का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई अधिकारी पालन में लापरवाही करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अंतरिम आदेश के साथ कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 24 मार्च तय की है।
सालाई और धावड़ा पेड़ों पर किये जा रहे ‘जख्म’
हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में आरोप है कि बुरहानपुर वन मंडल में ठेकेदार और माफिया द्वारा बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के पेड़ों पर गहरे कट लगाकर और केमिकल डालकर गोंद निकाला जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में पेड़ सूखने लगे हैं और आने वाले वर्षों में इन प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट मंडराने की आशंका जताई गई है।
14 फरवरी 2024 का बैन भी बेअसर?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी ने कोर्ट को बताया कि 14 फरवरी 2024 को गोंद निकालने पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि बैन के बाद भी अवैध दोहन जारी है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप
यह जनहित याचिका किसान शौकत अली और पत्रकार जितेंद्र रावतोले ने दायर की है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से मजबूर होकर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब देखना यह है कि 24 मार्च की सुनवाई में प्रशासन क्या जवाब देता है और क्या जंगलों को ‘गोंद माफिया’ से राहत मिल पाएगी?
