LAW'S VERDICT

केस डायरी दबाने पर SHO सस्पेंड, 3 लाख की ठगी करने वाले को अग्रिम जमानत नहीं



नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने के आरोपी ने हाईकोर्ट में लगाई थी अर्जी 

जबलपुर। आपराधिक मामलों में पुलिस की भूमिका कैसी होती है, इसका एक उदाहरण मप्र हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में सामने आया है। दरअसल ठगी के एक आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बैतूल पुलिस से केस डायरी बुलाई थी, जो नहीं भेजी गई। जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने इसे गंभीरता से लेते हुए बैतूल के एसपी वीरेंद्र जैन को तलब किया। अदालत द्वारा लगाई गई कड़ी फटकार के बाद एसपी जैन ने कोर्ट को बताया कि इस गंभीर लापरवाही पर आमला थाने के SHO को ससपेंड किया गया है। इस बयान को नाकाफी पाते हुए जस्टिस अहलूवालिया ने राज्य के डीजीपी को कहा- जिले के एसपी ही लोगों के जीवन और स्वतंत्रता को लेकर संजीदा नहीं हैं। अब खुद वे (डीजीपी) ही तय करें कि ऐसे मामले में आगे क्या किया जाए। बहरहाल, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने नौकरी लगाने के नाम पर 3 लाख की ठगी करने वाले आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इंकार करके उसकी अर्जी खारिज कर दी।

3 लाख की नौकरी ठगी करने वाले ने लगाईं थी अर्जी 

यह अग्रिम जमानत अर्जी बैतूल जिले के आमला थाने के ग्राम अंधारिया में रहने वाले प्रवीण देशमुख ने दाखिल की थी। उस पर आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से 3 लाख रुपये वसूले और न तो बेरोजगारों को नौकरी  दिलाई और न ही रकम लौटाई गई, उलटे उन्हें धमकी दी गई। अमला थाना पुलिस ने आरोपी प्रवीण देशमुख के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 294 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने यह अर्जी दाखिल की गई थी।

कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पेश हुई केस डायरी

मामले की पहली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को हुई थी, जब केस डायरी पेश नहीं की गई। कोर्ट ने सकारी पक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अगली तारीख पर डायरी तलब की जाए। लेकिन अगली सुनवाई में भी डायरी प्रस्तुत नहीं की गई। ऐसे रवैये को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने न केवल इसे  नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया में बाधा और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।

तलब हुए SP, देना पड़ा जवाब, SHO निलंबित

पुलिस अधीक्षक (SP) वीरेंद्र जैन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। SP जैन ने अदालत को बताया कि 4 फरवरी को न्यायालय का पत्र मिलने के बावजूद SHO ने जानबूझकर केस डायरी नहीं भेजी। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए SHO को सस्पेंड कर प्रारंभिक विभागीय जांच शुरू कर दी गई। कोर्ट ने पूरे मामले को पुलिस महानिदेशक (DGP) के संज्ञान में लेने के निर्देश भी दिए।

आरोपी को राहत नहीं, अर्जी हुई खारिज  

मामले में आरोपी प्रवीण देशमुख पर लगे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कहा- आरोपी पर स्पष्ट आरोप लगे हैं। हमारी राय में यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमे आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। अदालत ने इस मत के साथ आरोपी की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।  

हाईकोर्ट का आदेश देखें   MCRC-3230-2026

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