बच्चों की मौतों पर संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव सहित 7 से माँगा जवाब
इंदौर। उज्जैन स्थित सेवाधाम आश्रम में 17 बच्चों की मौत के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने पाया कि वहीं जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुल 38 बच्चों की मृत्यु होने की बात सामने आई है। बेंच ने राज्य सरकार सहित 7 को नोटिस जारी करते हुए रजिस्ट्रार को इस प्रकरण को जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है।
86 बच्चों को भेजा गया था, एक साल में 17 की मौत
मामला इंदौर के युगपुरुष धाम से उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजे गए 86 बच्चों से जुड़ा है। एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक एक वर्ष के भीतर इनमें से 17 बच्चों की मौत हो गई। इतना ही नहीं, जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुल 38 बच्चों की मौत के तथ्य भी सामने आए हैं। प्राथमिक तौर पर आश्रम में कुप्रबंधन, प्रशासनिक लापरवाही और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव को संभावित कारण माना जा रहा है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की आशंका
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि मामला प्रथम दृष्टया बच्चों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा प्रतीत होता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के साथ-साथ Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 और Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के संभावित उल्लंघन का संकेत देता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आश्रय गृहों में रह रहे बच्चों को न्यूनतम स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं, तो यह राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी का गंभीर प्रश्न है।
