अब डीजीपी तय करें कि पुलिस अफसरों को बुनियादी ट्रेनिंग दी जाए या नहीं, नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी की जमानत अर्जी हाईकोर्ट से खारिज
जबलपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेतूल पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराज़गी जताते हुए पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन की कानूनी समझ पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद भी असली आरोपी की तलाश में पुलिस की निष्क्रियता ‘कानून की अज्ञानता’ और ‘कर्तव्यहीनता’ को दर्शाती है। अदालत ने डीजीपी को कहा है कि वे इस बात पर विचार करें कि एसपी स्तर के अधिकारियों को कानून की बुनियादी ट्रेनिंग के सम्बन्ध में लीगल ट्रेनिंग की जरूरत है या नहीं? इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर फिर से जांच के आदेश बैतूल एसपी दिया और मामले के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
डीएनए जांच में हुआ खुलासा
मामला शाहपुर थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 650/2025 से जुड़ा है, जिसमें आरोपी जीतेन्द्र यादव को 10 अक्टूबर 2025 से जेल में रखा गया है। अभियोजन के अनुसार नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म हुआ और बच्चा पैदा हुआ। हालांकि डीएनए टेस्ट में आरोपी बच्चे का जैविक पिता नहीं पाया गया, जिससे यह साफ हुआ कि किसी अन्य व्यक्ति ने भी पीड़िता का यौन शोषण किया हो सकता है। इसके बावजूद पुलिस ने आगे की जांच में कोई तत्परता नहीं दिखाई। इस आधार पर आरोपी ने जमानत पाने यह अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मौजूद एसपी वीरेन्द्र जैन से पूछा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद क्या कार्रवाई की गई, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
पिछली घटनाओं से पुलिस ने सबक नहीं लिया
सुनवाई के बाद दिए फैसले में जस्टिस अहलूवालिया ने कहा- पुलिस विभाग ने पूर्व की घटनाओं (सागर, दतिया) से भी कोई सबक नहीं लिया। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कानून की बुनियादी समझ तक नहीं है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट की अनुमति के बिना ‘बयान’ लेना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर भी जांच करनी चाहिए थी। कोर्ट ने दो टूक कहा कि “ऐसा लगता है कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय आंखें मूंदे बैठी है।”
तो क्या जनता ऐसे ही परेशान होती रहेगी
"यह विचार करना अब मप्र के पुलिस महानिदेशक का दायित्व है कि क्या अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों, जिनमें पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं, को विधिक प्रशिक्षण दिया जाएगा या फिर कानून की जानकारी के अभाव में प्रदेश की आम जनता यूं ही परेशान होती रहेगी।"
— जस्टिस अहलूवालिया
एसपी को फिर से जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने एसपी बेतूल को निर्देश दिए हैं कि ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर पुनः जांच की जाए। सभी संदिग्धों के ब्लड सैंपल लेकर डीएनए टेस्ट कराएं। नाबालिग से पैदा हुए बच्चे के असली जैविक पिता का पता लगाएं और एक सप्ताह में रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को सौंपें। साथ ही आदेश की प्रति डीजीपी मध्यप्रदेश को भी भेजी जाए, ताकि वे पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर विचार कर सकें।
आरोपी को जमानत नहीं
कोर्ट ने साफ किया कि केवल डीएनए मैच न होने के आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि पीड़िता की गवाही अभी दर्ज नहीं हुई है। इसी आधार पर आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-6398-2026
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