यह फैसला जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पशु चिकित्सकों को मेडिकल और डेंटल अफसरों से अलग नहीं किया जा सकता, और वे समान आधार पर वेतन व करियर प्रोग्रेशन के हकदार हैं।
उसी तारीख से मिलेगा लाभ, जिस दिन डेंटल डॉक्टरों को मिला
हाईकोर्ट ने कहा कि वेटरनरी डॉक्टरों को यह लाभ उसी तिथि से दिया जाएगा, जिस दिन से डेंटल डॉक्टरों को टाइम-स्केल वेतनमान का लाभ दिया गया था। साथ ही अदालत ने एरियर का भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं।
क्या था मामला?
यह याचिका जबलपुर निवासी वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. विष्णु कुमार गुप्ता और 22 अन्य वेटरनरी डॉक्टरों की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मेडिकल ऑफिसर और डेंटल सर्जनों को 5, 10, 15 और 30 साल की सेवा पर उच्च वेतनमान मिलता है जबकि वेटरनरी डॉक्टरों को यह लाभ 8 साल बाद दिया जाता है। यह भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का भी हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मणिकांत शर्मा ने
दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि—
वेटरनरी डॉक्टरों को मेडिकल और डेंटल अफसरों के बराबर करियर प्रोग्रेशन से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है, जिससे यह कानूनी स्थिति और मजबूत हो गई।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा—
“उच्च वेतनमान योजना का उद्देश्य कर्मचारियों में ठहराव को समाप्त करना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। वेटरनरी डॉक्टरों को इस लाभ से वंचित करना मनमाना और असंवैधानिक है।”
सरकार को स्पष्ट निर्देश
अदालत ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि वेटरनरी डॉक्टरों को 5, 10, 15 और 30 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर मेडिकल और डेंटल अफसरों के समान टाइम-स्केल वेतनमान और पूरे एरियर भुगतान किया जाए।
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