हाईकोर्ट ने कहा- रेवेन्यू बोर्ड के आदेश पर अमल नहीं हुआ तो पीएस रेवेन्यू व रायसेन कलेक्टर रहें हाजिर
क्या है मामला?
यह याचिका रायसेन जिले की बाड़ी तहसील के ग्राम गडरवास निवासी 86 वर्षीय किसान हिमाचल सिंह सहित 62 अन्य किसानों द्वारा दायर की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कुल 363.18 एकड़ भूमि के सीलिंग विवाद पर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, मध्य प्रदेश ने 2 दिसंबर 2002 को रायसेन कलेक्टर को मामले की पुनः सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद करीब दो दशक बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ, जिस पर यह याचिका दाखिल की गई।
90 दिनों की मांग पर कोर्ट नाराज
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी और पीयूष कुमार तिवारी पेश हुए। वहीं रायसेन कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने फिर से बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के आदेश के पालन के लिए 90 दिन की मोहलत मांगी। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और केवल 15 दिन का समय दिया गया।
“एक माह तक साधे रखी चुप्पी”
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि 27 सितंबर को पारित आदेश के बाद एक महीने तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में 30 अक्टूबर को कमिश्नर द्वारा आदेश जारी किया गया। कोर्ट ने कहा कि इस एक माह की देरी का अधिकारियों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। महाधिवक्ता की मौजूदगी में अंडरटेकिंग देने के बावजूद अब फिर से 90 दिन की मांग करना अनुचित है।
कलेक्टर के खिलाफ जारी हुआ था वारंट
गौरतलब है कि इसी मामले में कोर्ट में हाजिर न होने पर 19 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने डीजीपी के माध्यम से रायसेन कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा के खिलाफ ₹25 हजार का जमानती वारंट जारी किया था।
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