LAW'S VERDICT

विवाह के बाद बने डोमिसाइल पर आरक्षण से इनकार गलत


इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:  उच्‍च माध्‍यमिक शिक्षक भर्ती में कैंडिडेचर रद्द करने के आदेश ख़ारिज 

इंदौर। उच्‍च माध्‍यमिक शिक्षक (Uchha Madhyamik Shikshak) भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। अलग-अलग चयन प्रक्रियाओं में SC/ST/OBC वर्ग की महिला अभ्यर्थियों की कैंडिडेचर रद्द करने संबंधी आदेशों को जस्टिस जेके पिल्लई की अदालत ने अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। 6 मामलों पर आया यह फैसला 
खास तौर पर उन महिला अभ्यर्थियों के लिए नज़ीर बनेगा, जो विवाह के बाद दूसरे राज्य में डोमिसाइल प्राप्त करती हैं और भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण लाभ से वंचित कर दी जाती हैं।

क्या था विवाद

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विवाह से पहले वे अन्य राज्य की निवासी थीं और वहां की सक्षम प्राधिकारी द्वारा उन्हें वैध SC/ST/OBC जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। विवाह के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश के स्थायी निवासी से विवाह किया, जिसके पश्चात शासन की नीति के अनुसार उन्हें मध्यप्रदेश का डोमिसाइल प्रमाण पत्र जारी किया गया। डोमिसाइल मिलने के बाद उन्होंने राज्य में उपलब्ध सभी संवैधानिक और वैधानिक आरक्षण लाभ पाने का दावा किया।

भर्ती में चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन पर रद्द हुई कैंडिडेचर

याचिकाकर्ताओं ने उच्‍च माध्‍यमिक शिक्षक के पदों हेतु जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया, लिखित परीक्षा में मेरिट के आधार पर सफल हुईं और दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया।
लेकिन इस चरण में बिना कोई कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना, केवल इस आधार पर कैंडिडेचर रद्द कर दी गई कि उन्होंने मध्यप्रदेश द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भर्ती विज्ञापन में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था, जिसमें केवल मध्यप्रदेश द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया हो। बिना सुनवाई के कैंडिडेचर रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

कोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि संबंधित प्राधिकारी यह जांच करें कि याचिकाकर्ताओं की जाति/समुदाय दोनों राज्यों में आरक्षित श्रेणी में मान्य है या नहीं। यदि जाति दोनों राज्यों में आरक्षित पाई जाती है, तो याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्हें सीनियरिटी निर्धारण, काल्पनिक वेतन निर्धारण (Notional Pay Fixation) तथा अन्य सभी परिणामी लाभ दिए जाएं, उसी तिथि से जब समान परीक्षा के अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी की जाए।

W.P. No.10277/2021

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