अब नगर परिषद नागौद के वार्ड नंबर 13 की जनता दोबारा चुनेगी अपना पार्षद
नामांकन में गलत जानकारी पड़ी भारी
चुनाव न्यायाधिकरण ने यह पाया था कि निर्वाचित पार्षद मो. सोहराब ने नामांकन पत्र और शपथपत्र में लंबित आपराधिक मामलों और आय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। इसे भ्रष्ट आचरण मानते हुए न्यायाधिकरण ने उनका पार्षद पद पर हुए निर्वाचन निरस्त कर दिया था। साथ ही उप विजेता मो. नफीस को विजय घोषित किया गया था। फैसले के इसी हिस्से को चुनौती देकर यह मामला मो. सोहराब ने हाईकोर्ट में दाखिल किया था।
रनर-अप को पार्षद बनाना गलत : हाईकोर्ट
हालांकि न्यायाधिकरण ने चुनाव रद्द करने के साथ-साथ चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को पार्षद घोषित कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब चुनाव बहुकोणीय मुकाबले (7 प्रत्याशी मैदान में) का हो, तो विजयी प्रत्याशी के मत हटाने के बाद यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि मतदाता किसे वोट देते।
मतों का गणित भी बना आधार
आंशिक रूप से मंजूर हुई याचिका
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता मो. सोहराब की पुनरीक्षण याचिका पर रनर-अप मो. नफीस को पार्षद घोषित करने वाला आदेश रद्द कर दिया, जबकि मो. सोहराब के चुनाव को निरस्त करने का फैसला बरकरार रखा।
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