LAW'S VERDICT

PIL व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने का माध्यम नहीं: बुरहानपुर रेत खनन मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

 

अवैध रेत उत्खनन के आरोपों वाली जनहित याचिका खारिज, कहा– प्रायोजित मुकदमेबाजी स्वीकार्य नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ ने बुरहानपुर जिले में कथित अवैध रेत खनन और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जनहित याचिका का उपयोग व्यक्तिगत दुश्मनी का बदला लेने या किसी एक ठेकेदार को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जा सकता

यह फैसला प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सोमवार को सुनाया।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए थे

बुरहानपुर निवासी वीरेंद्र पाटिल द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिले में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। याचिका में दावा किया गया कि खनन माफिया प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से—

  • अवैध उत्खनन कर रहे हैं

  • सरकारी रॉयल्टी की चोरी हो रही है

  • कुछ फर्मों ने कार्टेल बनाकर कृत्रिम कमी पैदा की

  • रेत के दाम असामान्य रूप से बढ़ा दिए गए

याचिका में बुरहानपुर की तत्कालीन कलेक्टर भाव्या मित्तल सहित खनिज विभाग के अधिकारियों को नामजद किया गया था।

कोर्ट का स्पष्ट रुख

मामले की सुनवाई 18 दिसंबर 2025 को पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया था। सोमवार को फैसला सुनाते हुए डिवीजन बेंच ने कहा—

  • यह याचिका पूरी तरह से प्रायोजित (Sponsored PIL) प्रतीत होती है

  • याचिका का उद्देश्य व्यापक जनहित में न होकर एक विशेष रेत कारोबारी को निशाना बनाना है

  • अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए खनिज अधिनियम और अन्य कानूनों में पहले से विस्तृत प्रावधान मौजूद हैं

कोर्ट ने दो टूक कहा कि जब कानून में वैकल्पिक और प्रभावी उपाय उपलब्ध हों, तब इस तरह की दुर्भावनापूर्ण जनहित याचिकाओं में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने दलील दी कि याचिका तथ्यों पर आधारित न होकर व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित है और इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष

सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया और किसी भी प्रकार की राहत देने से इंकार कर दिया।

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