प्रमोशन में आरक्षण पर MP हाईकोर्ट में अब 13 जनवरी को होगी सुनवाई
प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अजाक्स (AJAKS) की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के विपरीत प्रावधान बनाए हैं, जो असंवैधानिक हैं।
मामले की सुनवाई संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई। बेंच ने प्रकरण पर अगली सुनवाई 13 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे तय की है। उम्मीद जताई गई है कि उसी दिन मामलों की सुनवाई पूरी हो सकती है।
45 याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई
ये मामले भोपाल की वेटेरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर 45 याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में मप्र सरकार द्वारा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर बनाए गए नियमों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
अजाक्स की दलील: नए नियम इंदिरा साहनी फैसले के उलट
अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. केएस चौहान, रामेश्वर पी सिंह ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में प्रमोशन और आरक्षण को लेकर स्पष्ट मापदंड तय किए गए हैं।
अजाक्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पहले अनारक्षित वर्ग को प्रमोशन दिया जाना चाहिए, जबकि मप्र सरकार के नए नियमों में पहले आरक्षित वर्ग को प्रमोशन देने का प्रावधान किया गया है, जो संविधान और सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत है।
बेंच का सवाल और याचिका में संशोधन
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने सवाल किया कि यदि नियमों में गंभीर असंवैधानिकता है, तो उन्हें सीधे चुनौती क्यों नहीं दी गई। इस पर अजाक्स ने कहा कि प्रदेश में पिछले करीब 9 वर्षों से प्रमोशन पहले ही रुके हुए हैं और वे न्यायिक प्रक्रिया को और उलझाना नहीं चाहते थे।
हाईकोर्ट ने इस दलील को सुनते हुए अजाक्स को याचिका में संशोधन की अनुमति दे दी और 13 जनवरी को फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिए।
क्यों अहम है यह मामला
प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ा यह विवाद प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है। हाईकोर्ट के आने वाले अंतिम फैसले से मप्र में वर्षों से रुके प्रमोशन पर बड़ा असर पड़ सकता है।