नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण (13%) से जुड़े मामलों में फंसे हजारों अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए होल्ड किए गए ओबीसी अभ्यर्थियों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी है।
यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2025 को Transfer Petition (Civil) No. 398/2025 में अंतरिम आदेश पारित कर ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के चलते राज्य में शिक्षकों सहित विभिन्न पदों पर चयनित ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्तियां होल्ड कर दी गई थीं।
सुको के अंतरिम आदेश से रुकी थी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के मामलों में सुनवाई से इनकार किया जा रहा था। इसी के खिलाफ मध्य प्रदेश के लगभग 20 ओबीसी अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्रमांक 23/26 दायर की थी।
खंडपीठ ने दी हाईकोर्ट में जाने की छूट
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरैश एवं माननीय न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि होल्ड अभ्यर्थी अब अपने मामलों को लेकर हाईकोर्ट में स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकते हैं।
नियुक्ति अटकी अभ्यर्थियों में उम्मीद
याचिकाकर्ताओं की ओर से आर.पी.एस. लॉ एसोसिएट्स के अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है और लंबे समय से अटकी नियुक्तियों पर निर्णय का रास्ता साफ हो सकता है।
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Supreme-Court

Vineet Kumar Bunkar
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