याचिका में क्या कहा गया?
याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट परिसर के सामने स्थित भूमि पर एडवोकेट्स चेम्बर्स और मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण का भूमिपूजन 4 मई 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश सूर्यकांत (अब चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया), जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा सहित मप्र हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश उपस्थित थे। याचिका में यह भी उल्लेख है कि 5 मई को राज्य सरकार ने इस 116 करोड़ रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन भूमिपूजन के छह माह बाद भी वित्तीय स्वीकृति नहीं दी गई। इसके चलते परियोजना ठप पड़ी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वकीलों के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है और अनावश्यक देरी अवैधानिक है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ
गुरुवार की सुनवाई में श्री जैन ने बताया कि हाईकोर्ट के सामने पार्किंग समस्या विकराल हो चुकी है और रोजाना ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। उन्होंने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को तलब करने की भी मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने फिलहाल वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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