LAW'S VERDICT

70 करोड़ की काली कमाई में फंसे MPMKVVCLके अतिरिक्त महाप्रबंधक पर चलेगा मुकदमा

अवैध संपत्ति मामला: हाईकोर्ट ने खारिज की प्रदीप चौधरी की याचिका, ट्रायल जारी रहेगा

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए  मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल के रिटायर्ड एडिशनल जनरल मैनेजर प्रदीप चौधरी की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में उन्होंने धारा 482 CrPC के तहत अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट और आरोप तय करने के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

प्रदीप चौधरी, जो कि मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPMKVVCL) में अतिरिक्त महाप्रबंधक (क्लास-I अधिकारी) के पद पर पदस्थ थे, पर आरोप है कि उन्होंने अपने ज्ञात आय स्रोतों से अधिक, करीब 70 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की। इस संबंध में उनके खिलाफ लोकायुक्त ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(e) और 13(2) तथा IPC की धारा 120-B के तहत मामला दर्ज किया गया था।

याचिका में क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति (Sanction) एक अयोग्य अधिकारी (Joint Director) द्वारा दी गई है। नियमों के अनुसार, उन्हें सेवा से हटाने का अधिकार केवल प्रबंध संचालक (Managing Director) को था। इसलिए अभियोजन की स्वीकृति अवैध है और पूरा मामला रद्द किया जाना चाहिए। निचली अदालत द्वारा डिस्चार्ज आवेदन खारिज कर आरोप तय करना भी गलत है।

MD के अनुमोदन पर दी गई मंजूरी 

अपने फैसले में जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही स्वीकृति आदेश पर Joint Director के हस्ताक्षर हों, लेकिन उसे Managing Director द्वारा अनुमोदित किया गया है, जो सक्षम प्राधिकारी है। स्वीकृति की वैधता का प्रश्न तथ्य और कानून का मिश्रित प्रश्न है, जिसका निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। धारा 482 CrPC की शक्तियों का उपयोग वैध अभियोजन को रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से याचिकाकर्ता के बचाव के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आदेश साक्ष्यों पर आधारित 

कोर्ट ने माना कि निचली अदालत का आदेश कारणयुक्त और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित है।  आदेश किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या पक्षपात से ग्रस्त नहीं है। अदालत ने  याचिका खारिज कर दी और ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया।

MISCELLANEOUS CRIMINAL CASE NO.5062 of 2024

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