LAW'S VERDICT

डॉ. हरि सिंह गौर विवि का नियुक्ति घोटाला, हाईकोर्ट में सुनवाई 10 फरवरी तक टली


जबलपुर।  
सागर स्थित डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में 78 असिस्टेंट प्रोफेसरों की कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़े मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 10 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष केन्द्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने हेतु समय मांगा गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। खंडपीठ ने साथ ही यह निर्देश भी दिया कि एकलपीठ के आदेश को 15 मार्च तक शिथिल रखा जाएगा। यानी, तब तक नियुक्तियों के सम्बन्ध में  एकलपीठ के फैसले पर अमल नहीं होगा।

पृष्ठभूमि क्या है?

इस मामले में सागर के डॉ. दीपक गुप्ता सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई नियुक्तियों को चुनौती दी थी। याचिका के अनुसार विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। 14 नवंबर 2022 को कार्यपरिषद की बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर के 82 पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया गया। आरोप है कि इन 82 पदों के स्थान पर फर्जीवाड़ा कर 157 नियुक्तियां कर दी गईं।

एकलपीठ का सख्त फैसला

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने 14 नवंबर 2022 के कार्यपरिषद के निर्णय को रद्द करके 78 नियुक्तियों को अवैध करार दिया।  साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर 7 फरवरी 2020 के कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार नई नियुक्तियां करने के निर्देश दिए।

अब आगे क्या?

इसी एकलपीठ के फैसले को चुनौती देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने खंडपीठ में अपील दायर की है। फिलहाल केन्द्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय मिल गया है। अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी  और एकलपीठ का आदेश 15 मार्च तक स्थगित रहेगा।

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