LAW'S VERDICT

नाबालिग को वयस्क मानकर ट्रायल तो हो सकता है, पर सजा JJ Act के तहत ही होगी

 MP हाईकोर्ट ने तय की लक्ष्मण रेखा, दुष्कर्म मामले में दो नाबालिग बरी, एक की सजा घटाई 

जबलपुर। High Court of Madhya Pradesh ने एक अहम फैसले में जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015 (JJ Act) के प्रावधानों के सम्बन्ध में लक्ष्मण रेखा खींची है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि यदि कोई नाबालिग (Child in Conflict with Law) को धारा 19 के अंतर्गत वयस्क के रूप में मुकदमे का सामना करना पड़ता है, तो भी चिल्ड्रन्स कोर्ट को JJ Act के प्रावधानों के अनुरूप ही ट्रायल करना जरूरी है। हालांकि, प्रक्रिया संबंधी पहलुओं में दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन यह तभी तक होगा जब तक JJ Act के प्रावधानों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित हुआ हो

इन टिप्पणियों के साथ डिवीज़न बेंच ने चिल्ड्रन्स कोर्ट, वैढन (जिला सिंगरौली) द्वारा तीनो नाबालिग आरोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को आंशिक रूप से पलट दिया है।  दो नाबालिग अभियुक्तों ST और SD को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि तीसरे नाबालिग DB की सजा को गंभीर धाराओं से घटाकर POCSO Act के तहत 5 साल की सजा और कुल 13 हजार रूपए के जुर्माने में परिवर्तित कर दी गई।

क्या था मामला

अभियोजन के अनुसार, 11 वर्ष 6 माह की नाबालिग ने शिकायत में आरोप लगाया था कि दिसंबर 2019 में उसके साथ अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और MIG कॉलोनी स्थित मैरिज हॉल में कई बार शारीरिक शोषण किया गया। जनवरी 2021 में FIR दर्ज हुई। 7 मार्च 2023 को चिल्ड्रन्स कोर्ट ने तीनों नाबालिगों को गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ तीनो नाबालिग आरोपियों ने 3 अपीलें हाईकोर्ट में दाखिल की थीं।

रिकॉर्ड पर नहीं थे अहम सबूत: हाईकोर्ट 

  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में गंभीर कमी: जिस फोटो/वीडियो के आधार पर आरोप लगाए गए, वे चिल्ड्रन्स कोर्ट के रिकॉर्ड पर उपलब्ध ही नहीं थे

  • तिथियों में विरोधाभास: जिन तस्वीरों की बात की गई, उनकी तिथियां कथित घटना अवधि से मेल नहीं खातीं।

  • अन्य आरोपियों के पास कोई डिवाइस बरामद नहीं: केवल DB से एक मोबाइल मिला, बाकी से कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नहीं।

  • ‘स्टर्लिंग विटनेस’ की कसौटी पर बयान असफल: स्वतंत्र/फॉरेंसिक/चिकित्सकीय पुष्टि के अभाव में अभियोजन कथन भरोसेमंद नहीं पाया गया।

  • 21 साल का हो गया है आरोपी DB

  •  ST और SD बरी: दोनों को तत्काल रिहा करने के आदेश (यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हों)।

  • 21 साल के हो चुके आरोपी DB की सजा में संशोधन करके डिवीज़न बेंच ने न सिर्फ दुष्कर्म जैसी गंभीर धाराएं हटाईं, बल्कि उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए।

  • CRA NO.5028 OF 2023 CRIMINAL APPEAL NO.5028 OF 2023 

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