10 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के निर्देश
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही में पदस्थ एक सिविल जज से कथित बदसलूकी के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना के एक मामले में वकील उमेश जैन को नोटिस जारी कर 10 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की।
क्या है पूरा मामला?
आपराधिक अवमानना का यह प्रकरण भैंसदेही में पदस्थ सिविल जज महेंद्र सिंह मेहसन द्वारा हाईकोर्ट को भेजे गए पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। आरोप है कि 28 अक्टूबर 2025 को एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक पक्ष के वकील उमेश जैन ने न्यायालय की गरिमा के विपरीत व्यवहार किया और जज के प्रति व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां करने वाले वकील के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे कृत्यों को बढ़ावा मिलेगा और न्यायिक अनुशासन प्रभावित होगा।
हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने पत्र को आपराधिक अवमानना के रूप में स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। शुक्रवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद बेंच ने अनावेदक वकील उमेश जैन को नोटिस जारी कर 10 फरवरी को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।