याचिका खारिज कर हाईकोर्ट ने कहा: बिना वैध वीजा भारत में रहने का अधिकार नहीं
जबलपुर। अवैध रूप से भारत में ठहरने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अफगानी युवक को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना वैध वीजा भारत में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, भले ही संबंधित व्यक्ति को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी से शरणार्थी का दर्जा ही क्यों न मिला हो। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने अफगानी नागरिक सैय्यद राशिद द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यूएनएचसीआर से शरणार्थी का दर्जा मिलना भारतीय वीजा कानूनों से छूट नहीं देता।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल में रह रहे सैय्यद राशिद ने याचिका में बताया था कि वह दिसंबर 2019 में अफ़ग़ानिस्तान से छात्र वीजा पर भारत आया। भोपाल के जागरण लेक सिटी विश्वविद्यालय से एम.ए. (जर्नलिज्म) की पढ़ाई की। कोविड-19 के कारण उसे वीजा विस्तार मिला। वर्ष 2022 में कोर्स पूरा किया। हालांकि, पढ़ाई पूरी होने के बावजूद उसने छात्र वीजा की अवधि में ही विश्वविद्यालय में नौकरी शुरू कर दी, जबकि उसका रोजगार वीजा कभी स्वीकृत नहीं हुआ।
वीजा खत्म, फिर भी भारत में ठहरा
सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक उसका वीजा 24 मार्च 2024 तक बढ़ाया, लेकिन इसके बाद भी याचिकाकर्ता भारत में ही बना रहा। इसी दौरान अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद उसे यूएनएचसीआर से शरणार्थी का दर्जा मिला। इसके बाद भोपाल जिला प्रशासन के डिप्टी कमिश्नर ने 8 जनवरी 2025 को उसे लीव इंडिया नोटिस जारी किया और एफआईआर दर्ज कराई, जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
वीजा समाप्त होने के बाद रुकना गैरकानूनी
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने दलील दी कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रुकना विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन द्वारा जारी लीव इंडिया नोटिस पूरी तरह वैध है।याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में कोई कानूनी खामी नहीं है और ऐसे मामले में अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
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