LAW'S VERDICT

बहू को पिछले दरवाजे से नियुक्ति दिलाने के आरोप पूर्व कुलपति ने नकारे


भ्रष्टाचार केस में हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को दिए दस्तावेजों पर विचार के निर्देश

जबलपुर। अपनी बहू को पिछले दरवाजे से नियुक्ति देने के आरोपों में घिरे कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने इस आरोप को नाकारा है।लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका में डॉ बिसेन ने दावा किया है कि उनकी बहू की जब नियुक्ति हुई थी,  तब वो कुलपति नहीं थे, लेकिन लोकायुक्त के जांच अधिकारी इस तथ्य पर विचार ही नहीं कर रहे हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीज़न बेंच ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज  मामले में जांच अधिकारी को कहा है कि वे डॉ.  बिसेन  द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर अनिवार्य रूप से विचार करे।  

क्या है पूरा मामला

मामला अपराध क्रमांक 0177/2023 से जुड़ा है, जो 5 अगस्त 2023 को युवा क्रान्ति संगठन के सचिव देवा झारिया की शिकायत पर लोकायुक्त द्वारा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप था कि डॉ.  बिसेन ने अपनी बहू धारणा टेम्भरे/बिसेन की नियुक्ति बालाघाट जिले के कृषि महाविधालय वारासिवनी में पिछले दरवाजे से नियुक्ति कराई है।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2), 13(1)(a) एवं 7(c) के तहत दर्ज प्रकरण पर सवाल उठाकर दाखिल की गई इस याचिका में दावा किया गया था   कि बहू की नियुक्ति जिस समय हुई, उस समय वे (डॉ.  बिसेन) कुलपति (Vice Chancellor) के पद पर पदस्थ ही नहीं थे। इसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन जांच अधिकारी द्वारा उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका यह भी दावा था कि नियुक्ति बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा की गई थी। याचिकाकर्ता का निर्णय प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं था और केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।

लोकायुक्त पक्ष का आश्वासन

सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से उपस्थित अधिवक्ता संजय सरवटे ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि यदि संबंधित दस्तावेज उनके माध्यम से जांच अधिकारी को सौंपे जाते हैं, तो चार्जशीट दाखिल करने से पूर्व उन पर विधिवत विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट का निर्देश

राज्य के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता सात दिन के भीतर सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करें, जिस पर जांच अधिकारी दस्तावेजों पर निष्पक्ष रूप से विचार करे। इस निर्देश के साथ बेंच ने डॉ.  बिसेन की याचिका का निराकरण कर दिया। 

MCRC-58158-2025

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