इंदौर हाईकोर्ट ने ट्रेनी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट को बहाल करने का दिया आदेश
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े अहम मामले में एक महिला कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने ट्रेनी (जूनियर ऑफिस असिस्टेंट) की नियुक्ति रद्द करने के आदेश को मनमाना और अवैध करार देते हुए उसे तत्काल बहाल करने तथा सेवा निरंतरता के साथ सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश जस्टिस जेके पिल्लई की एकलपीठ ने पारित किया।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता मनीषा छारेल एक अनुसूचित जनजाति (भीलाला) वर्ग से संबंधित हैं। उनके पिता, जो सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे, का 29 मार्च 2021 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति योजना, 2012 के तहत याचिकाकर्ता ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया। सभी औपचारिकताओं के बाद 29 जनवरी 2025 को उन्हें ट्रेनी (जूनियर ऑफिस असिस्टेंट) के पद पर नियुक्ति दी गई। उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर नियमित रूप से सेवाएं दीं और उन्हें आवास भी आवंटित किया गया।
किस आधार पर रद्द की गई नियुक्ति?
प्रशासन की ओर से 17 मई 2025 को यह कहते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया कि याचिकाकर्ता ने अपने बड़े भाई की पुलिस विभाग में नौकरी की जानकारी छुपाई है। जवाब देने के बावजूद 30 सितंबर 2025 को उनकी अनुकंपा नियुक्ति रद्द कर सेवा से हटा दिया गया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता के बड़े भाई 2013 से सरकारी सेवा में थे।वे अलग निवास करते हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। उनके आश्रित न होने का शपथपत्र पहले ही प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SPMCIL अनुकंपा नियुक्ति योजना, 2012 की धारा 5.4 के तहत ऐसे भाई को “आश्रित” नहीं माना जा सकता। ऐसे में तथ्य छुपाने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
प्राकृतिक न्याय का घोर उल्लंघन
अदालत ने कहा कि—
“बिना किसी विभागीय या तथ्यात्मक जांच के, केवल आरोप के आधार पर कर्मचारी की नियुक्ति रद्द करना और उसे कलंकित करना, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।”
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में भी दंडात्मक या कलंकित कार्रवाई से पहले उचित जांच अनिवार्य है। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने 30.09.2025 का आदेश रद्द किया। याचिकाकर्ता को तत्काल बहाल करने, सेवा निरंतरता और बर्खास्तगी की तारीख से पुनर्बहाली तक सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए।
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