नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि “ज़मानत नियम है और जेल अपवाद।” कोर्ट ने कहा कि विचाराधीन कैदियों को अनावश्यक रूप से जेल में रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत ने निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे ज़मानत याचिकाओं पर यांत्रिक रवैया न अपनाएं और अपराध की प्रकृति, सबूतों तथा आरोपी की भूमिका को ध्यान में रखें।
इस फैसले से देशभर की जेलों में बंद हज़ारों विचाराधीन कैदियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
Tags
Supreme-Court
