नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार केवल पुस्तकों या फैसलों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव दिखना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लापरवाही या उदासीनता के कारण यदि किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी।
इस टिप्पणी को नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक मज़बूत संदेश माना जा रहा है।
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