बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में कैशलेस इलाज समय की मांग है। कोर्ट ने कहा कि जटिल प्रक्रियाएं मरीज की जान पर भारी पड़ सकती हैं।
अदालत ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि CGHS और अन्य योजनाओं के तहत आपात स्थिति में तत्काल इलाज कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
यह आदेश देशभर की मेडिकल नीतियों पर असर डाल सकता है।
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