LAW'S VERDICT

एक ही पद, एक ही दिन रिटायरमेंट… फिर पेंशन में 3 गुना अंतर क्यों? हाईकोर्ट ने DGP को घेरा

रिटायर्ड हेड कांस्टेबल की ₹7,805 पेंशन, साथी कर्मचारी को ₹23,350; 30 अक्टूबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

एक ही पद पर कार्यरत और एक ही दिन सेवानिवृत्त हुए दो हेड कांस्टेबलों की पेंशन में भारी अंतर के मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने पुलिस मुख्यालय भोपाल के डीजीपी और सागर के पेंशन अधिकारी से जवाब तलब किया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों को 30 अक्टूबर तक व्यक्तिगत हलफनामे के जरिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।

एक ही दिन रिटायर, लेकिन पेंशन में हजारों का अंतर

मामला सागर निवासी रिटायर्ड हेड कांस्टेबल गोपाल कृष्ण गुप्ता की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार वह 30 जून 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। इसी दिन उनके साथ कार्यरत हेड कांस्टेबल राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा भी सेवानिवृत्त हुए। याचिका में दावा किया गया है कि गोपाल कृष्ण गुप्ता की मासिक पेंशन 7,805 रुपये निर्धारित की गई, जबकि उसी पद पर कार्यरत और उसी दिन रिटायर हुए राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा की पेंशन 23,350 रुपये प्रतिमाह तय की गई। यानी दोनों पेंशन के बीच करीब 15,545 रुपये प्रतिमाह का अंतर है।

याचिकाकर्ता ने बताया भेदभाव

याचिकाकर्ता का कहना है कि समान पद और समान तारीख को सेवानिवृत्त होने के बावजूद पेंशन में इतना बड़ा अंतर प्रथमदृष्टया भेदभावपूर्ण है। उन्होंने इस विसंगति को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष अक्टूबर 2019 में अभ्यावेदन भी दिया था। आरोप है कि अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

DGP और पेंशन अधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा

मामले की सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षित पाण्डेय ने अदालत के समक्ष दलीलें रखीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल ने पुलिस मुख्यालय भोपाल के डीजीपी और सागर के पेंशन अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने समयसीमा को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि 30 अक्टूबर तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो 4 नवंबर की अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

अब अधिकारियों के जवाब पर टिकी नजर

हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद अब अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि समान पद और समान सेवानिवृत्ति तिथि के बावजूद दोनों कर्मचारियों की पेंशन में इतना बड़ा अंतर किस आधार पर किया गया। अगली सुनवाई में अधिकारियों का जवाब इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें       WP-23682-2019

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