LAW'S VERDICT

इंदौर में अवैध होर्डिंग्स पर हाईकोर्ट नाराज: पुराने आदेश के बाद भी कार्रवाई न होने को बताया दुखद, चीफ सेक्रेटरी तक पहुंचाओ आदेश

सड़कों पर बैनर-गेट-कटआउट के खिलाफ याचिका; हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में प्रतिनिधित्व पर फैसला करने के दिए निर्देश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, इंदौर। 

इंदौर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति लगाए जा रहे अवैध होर्डिंग्स, बैनर, गेट और कटआउट को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। जस्टिस संदीप एन भट्ट की अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही आदेश जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा उनका पालन नहीं किया जाना दुखद है। हाईकोर्ट ने इंदौर के संबंधित प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के 29 जुलाई 2026 के अभ्यावेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को पूरे मामले को गंभीरता से देखने और आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना अनुमति होर्डिंग्स पर कार्रवाई की मांग

इंदौर निवासी प्रह्लाद पांडेय की ओर से याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी। इसमें मध्य प्रदेश आउटडोर एडवरटाइजमेंट मीडिया रूल्स, 2017 और राज्य सरकार के लागू निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इंदौर में सार्वजनिक सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति बड़े पैमाने पर होर्डिंग्स, बैनर, गेट और कटआउट लगाए जा रहे हैं। याचिका में इन अवैध विज्ञापन संरचनाओं को हटाने के साथ-साथ उन्हें लगाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और हटाने का खर्च भी उन्हीं से वसूलने की मांग की गई थी।

नागरिक ऐप में शिकायत की सुविधा की भी मांग

याचिका में इंदौर नगर निगम के नागरिक शिकायत मोबाइल एप्लिकेशन में अवैध होर्डिंग्स, बैनर और कटआउट की शिकायत दर्ज करने के लिए अलग श्रेणी बनाने का निर्देश देने की मांग भी की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे आम नागरिक सीधे तौर पर अवैध विज्ञापन संरचनाओं की शिकायत कर सकेंगे और प्रशासन के लिए उन पर कार्रवाई करना आसान होगा।

2022 में हाईकोर्ट पहले ही दे चुका है निर्देश

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान Outdoor Advertisers Association Vs. State of M.P. and Others में 14 जून 2022 को दिए गए आदेश का उल्लेख किया। अदालत ने पाया कि अवैध होर्डिंग्स से संबंधित मुद्दे पर पहले ही न्यायिक निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिकारियों ने उन निर्देशों के अनुरूप अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

29 जुलाई के अभ्यावेदन पर भी नहीं हुई कार्रवाई

याचिकाकर्ता ने इस संबंध में 29 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि उस पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार निर्धारित समय में निराकरण किया जाएगा।

चार सप्ताह में लेना होगा फैसला

हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि 29 जुलाई 2026 के अभ्यावेदन पर उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून के आधार पर चार सप्ताह के भीतर, यथासंभव शीघ्र निर्णय लिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के बाद इस समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की जानी है।

'आदेश का पालन नहीं होना दुखद'

हाईकोर्ट ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत पहले भी आदेश पारित कर चुकी है, लेकिन संबंधित अधिकारी उसका पालन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने इसे दुखद बताते हुए कहा कि पूर्व आदेशों का पालन उनकी वास्तविक भावना और उद्देश्य के अनुरूप किया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इंदौर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य शहरों में भी होर्डिंग्स से पैदा हो रही समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने के लिए मामले को देखा जाए। आदेश की एक प्रति राज्य सरकार के अधिवक्ता को आवश्यक अनुपालन और आगे की कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-33810-2026

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