LAW'S VERDICT

स्टॉप डेम फांदकर स्कूल क्यों पार करते हैं 9 बच्चे? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

अपनी जान जोखिम में डालकर हर रोज स्कूल पहुंचते हैं 9 बच्चे 

Laws Verdict News, जबलपुर |

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विदिशा जिले में बेतवा नदी के स्टॉप डेम पर बने पिलरों को पार कर स्कूली बच्चों के आने-जाने की खबर पर संज्ञान लेकर सख्त रुख अपनाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने खबर को जनहित याचिका का दर्जा देकर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। 

इससे पहले डिवीज़न बेंच ने वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और अधिवक्ता हिमान्शु मिश्रा को अदालत मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया।

क्या है पूरा मामला?

विदिशा जिले में बेतवा नदी पर बने स्टॉप डेम के लगभग चार-चार फीट की दूरी पर बने पिलरों को पार कर 9 स्कूली बच्चे, जिनमें 5 छात्राएं शामिल हैं, प्रतिदिन स्कूल पहुंचते हैं। सड़क मार्ग से स्कूल की दूरी लगभग 10 किलोमीटर होने के कारण बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर यह खतरनाक शॉर्टकट रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। इस घटना का समाचार सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने उस पर स्वतः संज्ञान लिया।

कोर्ट मित्र ने सुझाए दो विकल्प

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कोर्ट मित्र नमन नागरथ ने न्यायालय के समक्ष समस्या के समाधान के लिए दो महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

  • यदि संबंधित स्टॉप डेम का पिलर खतरनाक स्थिति में है, तो उसे हटाया या तोड़ दिया जाए।
  • यदि यह पुरानी संरचना है और इसे सुरक्षित रखा जा सकता है, तो इसके ऊपर पैदल चलने योग्य सुरक्षित मार्ग (Walkway) विकसित किया जाए, ताकि लोगों और स्कूली बच्चों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।

सरकार से पूछे अहम सवाल

कोर्ट मित्र के सुझावों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर सका कि संबंधित स्टॉप डेम का निर्माण कब किया गया था।

खंडपीठ ने यह सवाल भी उठाया कि यदि यह वास्तव में स्टॉप डेम है, तो उसमें लगाए जाने वाले लोहे के गेट कहां हैं और वर्तमान में वे क्यों नहीं लगे हैं।

सरकार को देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह स्टॉप डेम की निर्माण तिथि, वर्तमान स्थिति, रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था तथा भविष्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रस्तावित कदमों सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी, जिसमें राज्य सरकार को सभी बिंदुओं पर अपना विस्तृत पक्ष प्रस्तुत करना होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post