MP Excise Act Case में मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- धारा 59-A(i) में है अग्रिम जमानत पर रोक
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 65 लीटर से अधिक अवैध शराब बरामदगी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस रामकुमार चौबे की अदालत ने कहा कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 59-A(i) के तहत ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत पर स्पष्ट कानूनी रोक है, इसलिए आवेदन पर विचार करना भी विधिसम्मत नहीं है।
मामला सिमरिया थाना में दर्ज अपराध से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस को मिली थी मुखबिर से सूचना
अभियोजन के अनुसार 12 अप्रैल 2026 को पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी ने अपने मवेशियों के टपरे में अवैध शराब छिपाकर रखी है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने टपरे के पास दो लोगों को देखा। इनमें से एक व्यक्ति मौके से फरार हो गया, जबकि दूसरे आरोपी अनुज यादव को पुलिस ने पकड़ लिया। तलाशी के दौरान टपरे में जमीन के भीतर छिपाकर रखी गई 65 लीटर 700 मिलीलीटर अवैध शराब बरामद की गई।
आरोपी बोला- मुझसे शराब बरामद ही नहीं हुई
आवेदक की ओर से कहा गया कि उसे केवल सह-आरोपी अनुज यादव के मेमोरेंडम के आधार पर झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आवेदक डेयरी व्यवसाय करता है और उसके कब्जे से कोई शराब बरामद नहीं हुई।
यह भी कहा गया कि आवेदक के खिलाफ पूर्व में दर्ज अधिकांश मामलों में वह बरी हो चुका है और केवल एक मामला लंबित है। बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट की समन्वय पीठों द्वारा दिए गए दो पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की।
राज्य सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि बरामद शराब उसी टपरे से मिली, जो आवेदक के स्वामित्व और कब्जे में था। इसलिए आरोपी की “कंस्ट्रक्टिव पजेशन” स्पष्ट रूप से स्थापित होती है।
सरकार ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें चार मामले आबकारी अधिनियम से संबंधित हैं। साथ ही धारा 59-A(i) के तहत अग्रिम जमानत पर प्रतिबंध का हवाला दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा- आरोपी के टपरे से मिली है शराब
हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत सुनवाई के दौरान मामले के गुण-दोषों की विस्तृत जांच नहीं की जाती। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि अवैध शराब आरोपी के टपरे से बरामद हुई है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन पुराने आदेशों का हवाला दिया गया, उनमें धारा 59-A(i) के प्रतिबंध पर कोई चर्चा नहीं की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया: “धारा 59-A(i) मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत धारा 34(2) से जुड़े मामलों में अग्रिम जमानत पर स्पष्ट रोक लगाती है। ऐसे में अदालत इस आवेदन पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है।” इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-19646-2026
