POCSO में 20 साल की सजा पाए आरोपी को हाईकोर्ट से 15 दिन की जमानत
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष की सजा काट रहे एक आरोपी को एमएससी (केमेस्ट्री) की परीक्षा में शामिल होने के लिए 15 दिनों की अस्थायी जमानत प्रदान की है। आरोपी ने अदालत से कहा था कि यदि वह चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया तो उसका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो जाएगा और करियर बर्बाद हो सकता है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी शामिल थे, ने आरोपी की शैक्षणिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे परीक्षा देने की अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत अवधि समाप्त होने से पहले आरोपी को संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा।
एमएससी अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा देने मांगी थी राहत
जानकारी के अनुसार, रीवा जिले के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित बोदाबाग निवासी संजू कुशवाहा उर्फ राज शासकीय टीआरएस कॉलेज, रीवा में एमएससी (केमेस्ट्री) चौथे सेमेस्टर का छात्र है। उसकी परीक्षाएं 30 मई से 8 जून 2026 तक निर्धारित हैं।
आरोपी ने हाईकोर्ट में दायर अपील के साथ आवेदन प्रस्तुत कर कहा कि परीक्षा में शामिल होने का यह अंतिम अवसर है। यदि उसे अनुमति नहीं मिली तो उसकी पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
विशेष अदालत ने सुनाई थी 20 साल की सजा
संजू कुशवाहा को एक किशोरी से दुष्कर्म के मामले में रीवा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 19 फरवरी 2026 को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए उसने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है, जो विचाराधीन है।
अधिवक्ता की दलीलों पर मिली राहत
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता जयती ठाकुर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता नियमित छात्र है और परीक्षा में शामिल न हो पाने से उसकी उच्च शिक्षा बाधित हो जाएगी। दलीलों पर विचार करने के बाद वेकेशन बेंच ने आरोपी को 15 दिनों की अस्थायी जमानत प्रदान करते हुए परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी।
अदालत की शर्त
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि आरोपी केवल परीक्षा में शामिल होने के उद्देश्य से अस्थायी जमानत पर रिहा रहेगा और निर्धारित 15 दिनों की अवधि पूरी होने से पहले उसे पुनः सरेंडर करना होगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CRA-2675-2026
