LAW'S VERDICT

क्राइस्ट चर्च स्कूल के सामने सड़क बनी पार्किंग! हाईकोर्ट ने मांगा स्थायी समाधान

ट्रैफिक जाम होने पर नगर निगम ने दिया था 11 साल पहले नोटिस, हाईकोर्ट ने कहा- जवाब के साथ समाधान भी बताओ 

जबलपुर। यदि आप क्राइस्ट चर्च स्कूल के सामने से गुजरते हैं और स्कूल लगने और छूटने के टाइम वहां लगने वाले जाम में फंसे हैं, तो ये खबर आपके मतलब की है। जी हाँ, इस जाम की स्थिति को देखते हुए जबलपुर नगर निगम ने जनवरी 2025 में स्कूल प्रबंधन को नोटिस थमाया था, जिसको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जस्टिस दीपक खोत की अदालत ने याचिका का निराकरण करते हुए स्कूल प्रबंधन को कहा है कि वो 15 दिनों में नोटिस के जवाब के साथ जाम से निपटने का प्लान भी नगर निगम के सामने पेश करे। उसके बाद अगले 3 महीने के भीतर नगर निगम इस समस्या का स्थाई समाधान निकाले। 

जबलपुर स्थित Christ Church Boys Senior Secondary School ने यह याचिका दाखिल करके Jabalpur Municipal Corporation द्वारा 12 जनवरी 2015 को जारी नोटिस और उससे संलग्न पार्किंग प्लान को चुनौती दी थी। नोटिस में स्कूल को एक माह के भीतर पार्किंग व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था, अन्यथा निगम स्वयं कार्य कर उसकी लागत स्कूल से वसूलने की बात कही गई थी।

याचिकाकर्ता स्कूल की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुमित रघुवंशी तथा नगर निगम की ओर से अधिवक्ता सौरभ सुन्दर उपस्थित हुए।

हर एक आदमी होता है परेशान: ननि 

नगर निगम का कहना था कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय अभिभावकों की गाड़ियां तथा स्कूल वाहन सड़क पर खड़े होने से भारी ट्रैफिक अव्यवस्था उत्पन्न होती है। इससे आम नागरिकों की आवाजाही बाधित होती है और सड़क पर यातायात प्रभावित होता है।

हाईकोर्ट ने कहा- नोटिस क़ानून के मुताबिक़ नहीं 

अदालत ने माना कि सड़क पर अवरोध हटाने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगम को कार्रवाई का अधिकार है। साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी भवन का निर्माण बिना अनुमति या स्वीकृत नक्शे के विपरीत हो तो निगम विधि अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निगम द्वारा जारी नोटिस में पार्किंग निर्माण संबंधी जो निर्देश दिए गए थे, वे Madhya Pradesh Municipal Corporation के प्रावधानों के अनुरूप प्रतीत नहीं होते।

अदालत ने दिए ये निर्देश

अदालत ने आदेश दिया है कि-

  • स्कूल प्रबंधन 15 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब दे।
  • जवाब के साथ यह प्रस्ताव भी प्रस्तुत करे कि ट्रैफिक अव्यवस्था को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
  • नगर निगम स्कूल द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार कर कानून के अनुसार समस्या का समाधान निकाले।
  • 12 जनवरी 2015 के नोटिस के आधार पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
  • यदि कोई कार्रवाई की जाती है तो वह केवल विधि अनुसार ही हो।
  • पूरी प्रक्रिया तीन माह के भीतर पूरी की जाए।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय ट्रैफिक जाम की समस्या आम नागरिकों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है और इसके समाधान के लिए प्रशासन एवं संस्थानों के बीच समन्वय आवश्यक है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-1021-2015

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