LAW'S VERDICT

“नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा केस में बड़ा मोड़: अब जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच करेगी सुनवाई

चीफ जस्टिस की बेंच ने दिए निर्देश, 24 अप्रैल को होगी अहम सुनवाई 

जबलपुर। प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब इस मामले की सुनवाई विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच करेगी। मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश जारी किए। यह मामला न केवल हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि प्रदेश के नर्सिंग शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सीधा प्रभाव डालता है।

24 अप्रैल को होगी अगली अहम सुनवाई

याचिकाकर्ताओं की ओर से त्वरित सुनवाई की मांग रखते हुए बताया गया कि सीबीआई द्वारा अयोग्य घोषित किए गए 117 नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की परीक्षाएं 27 अप्रैल से प्रस्तावित हैं। ऐसे में यदि समय रहते न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो हजारों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने मामले को जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए और 24 अप्रैल की तारीख तय की।

30 हजार छात्रों के रिजल्ट पर पहले ही लग चुकी है रोक

इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट सख्त रुख अपना चुका है। 9 अप्रैल को कोर्ट ने वर्ष 2024 में जीएनएम परीक्षा देने वाले करीब 30 हजार छात्रों के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी। यह आदेश मामले की गंभीरता और संभावित अनियमितताओं को दर्शाता है।

2022 में दायर हुई थी जनहित याचिका

यह पूरा मामला वर्ष 2022 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसे लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने दाखिल किया था। याचिका में प्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा, मानकों की अनदेखी और अवैध मान्यता का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पहले ही सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे, जिसके बाद कई कॉलेजों को अयोग्य घोषित किया गया।

परीक्षा पर संकट, कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा ने कोर्ट में कहा कि जिन 117 कॉलेजों को सीबीआई ने अयोग्य ठहराया है, उनके छात्रों को परीक्षा में बैठाने की तैयारी हो रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कोर्ट से तत्काल निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को रोका या नियंत्रित किया जा सके।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें 24 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि:

- अयोग्य कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति मिलेगी या नहीं?

- पहले रोके गए परिणामों पर क्या फैसला होगा? 

- फर्जीवाड़े में शामिल संस्थानों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी?


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