LAW'S VERDICT

“मल्टी लेवल पार्किंग प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट: वित्त विभाग की मंजूरी, अब बस लॉ मिनिस्टर की हरी झंडी बाकी”

सरकार की और से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट में पेश किया ब्यौरा, अब सुनवाई 29 को 

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट परिसर के सामने प्रस्तावित मल्टी लेवल पार्किंग और एडवोकेट्स चेम्बर्स प्रोजेक्ट को लेकर राज्य सरकार ने अहम जानकारी दी है। मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच को सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रुपराह ने बताया कि प्रोजेक्ट को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है, अब केवल लॉ मिनिस्टर की स्वीकृति मिलना बाकी है। सरकार के इस बयान के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है। कोर्ट अब यह देखेगा कि लंबित अंतिम मंजूरी कब तक मिलती है और प्रोजेक्ट जमीन पर कब उतरता है।

भूमिपूजन को होने वाला है एक साल

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में बताया कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन 4 मई 2025 को किया गया था, और अब इसकी सालगिरह नजदीक है। उन्होंने आग्रह किया कि कम से कम इस अवसर से पहले वकीलों को इस प्रोजेक्ट की सौगात मिलनी चाहिए।

116 करोड़ का प्रोजेक्ट अब तक अटका

यह प्रोजेक्ट करीब 116 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होना है। भूमिपूजन के अगले ही दिन, 5 मई 2025 को राज्य सरकार ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया कि 6 महीने बीत जाने के बावजूद वित्तीय स्वीकृति नहीं दी गई, जिससे परियोजना ठप पड़ी रही। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

किसने दायर की याचिका

यह मामला मप्र हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन, अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के सचिव निखिल तिवारी द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल, अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय और सुरेंद्र वर्मा उपस्थित रहे, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने पक्ष रखा।

प्रोजेक्ट क्यों है महत्वपूर्ण

यह मल्टी लेवल पार्किंग और एडवोकेट्स चेम्बर्स प्रोजेक्ट न केवल वकीलों के लिए सुविधाएं बढ़ाएगा, बल्कि हाईकोर्ट परिसर के आसपास लंबे समय से चली आ रही पार्किंग समस्या का भी समाधान करेगा।

अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकता है कि यह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट आखिर कब जमीन पर उतरता है।

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