मृतक के भाई की अपील पर मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक साल पहले दफनाए गए शव को कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए यह जरूरी कदम है और इसमें किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मृतक गयासुद्दीन कुरैशी के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी की अपील पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को यह अहम आदेश पारित किया।
अदालत ने जबलपुर प्रशासन को निर्देश दिए कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक शव कब्र से निकाला जाए। तुरंत नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा जाए। बुधवार को ही दोपहर 1 बजे शव का पोस्टमार्टम कराया जाए।
क्या है पूरा मामला?
गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को हादसे में घायल हुआ। पहले जबलपुर, फिर नागपुर ले जाया गया। 27 मार्च 2025 को नागपुर में मौत हो गई। शव को बिना विस्तृत जांच के दफना दिया गया। मृतक के भाई का आरोप था कि
- डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान थे।
- मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।
- पुलिस को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
हाईकोर्ट की सख्ती: “समय पर पेश नहीं हुए तो कार्रवाई”
- राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह ने कहा कि अपीलकर्ता खुद सहयोग नहीं कर रहा। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए पोस्टमार्टम की मांग की। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त व अधिवक्ता मयंक शर्मा हाजिर हुए। सुनवाई के बाद डिवीज़न बेंच ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मृतक का परिवार (पत्नी, पुत्र और भाई) सुबह 11 बजे एसडीएम अधारताल के सामने उपस्थित हो। एसडीएम किसी एक मजिस्ट्रेट को नियुक्त कर पंचनामा की पूरी प्रक्रिया कराएं। यदि अपीलकर्ता क़सीमुद्दीन कुरैशी समय पर उपस्थित नहीं होता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WA-371-2026
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