कोर्ट ने जबलपुर एसपी और सीएसपी से किया सवाल, हिरासत पर जवाब देने के निर्देश
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर हाजी अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पहले सीएसपी सोनू कुर्मी से जवाब मांगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय को भी तलब कर लिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि- “आप सत्ता के गुलाम होंगे, हम नहीं हैं… हमने संविधान की शपथ ली है। हम संविधान के मुताबिक़ ही काम करते हैं।”
कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस अधिकारीयों से पूछा कि
- रज्जाक के खिलाफ कार्रवाई किन आधारों पर की गई?
- क्या यह कार्रवाई विधिसम्मत और निष्पक्ष थी?
रज्जाक ने लगाए हैं साजिश के आरोप
रज्जाक की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई कार्रवाई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के कारण हुई। यह पूरी कार्रवाई एक पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान विधायक के इशारे पर की गई। रज्जाक का कहना है कि वह 26 अगस्त 2021 से न्यायिक हिरासत में है।
विधायक पर लगे आरोप और कोर्ट की कार्रवाई
हाईकोर्ट के निर्देश पर 31 अक्टूबर को रज्जाक द्वारा विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक का नाम सामने आने पर कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, संजय पाठक ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उनका इस कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है
सुनवाई के दौरान कौन-कौन रहा मौजूद
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल उठाता है-
- क्या पुलिस कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष थी?
- क्या सत्ता के दबाव में निर्णय लिए गए?
- और क्या NSA जैसे कठोर कानून का दुरुपयोग हुआ?
