जज को फ़ोन करके संपर्क करने की कोशिश पर चीफ जस्टिस की डिवीज़न बेंच सोमवार को करेगी सुनवाई
जबलपुर। कटनी से भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा से संपर्क करने के मामले में गुरुवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने कहा कि विधायक संजय पाठक का यह कदम आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है। डिवीज़न बेंच ने विधायक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नया मामला दर्ज करने के निर्देश रजिस्ट्री कार्यालय को दिए हैं। इस आपराधिक अवमानना मामले पर सोमवार 6 अप्रैल को सुनवाई होगी।
न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश
याचिका कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की ओर से वर्ष 2025 में दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि भाजपा विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में निर्धारित थी। इसी दौरान 1 सितंबर 2025 को जस्टिस मिश्रा ने स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि विधायक द्वारा उनसे संपर्क करने की कोशिश की है। आशुतोष दीक्षित की वह याचिका फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है।
जस्टिस मिश्रा ने खुद को किया अलग
घटना के सामने आने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था। यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
कार्रवाई न होने पर लगाई है याचिका
याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने वर्ष 2026 में एक और याचिका दाखिल कर कहा था कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में यह नई याचिका दाखिल कर विधायक संजय पाठक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की।
मीडिया पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती उपस्थित रहे। हालाँकि सुनवाई के बाद डिवीज़न बेंच ने आशुतोष दीक्षित की याचिका का निराकरण करके याचिका में अनावेदक क्रमांक 7 बनाये गए विधायक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नया मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान विधायक पाठक की ओर से मांग की गई कि इस मामले से जुडी खबरें जारी करने से मीडिया को रोका जाए। इस मांग को ठुकराते हुए डिवीज़न बेंच ने मीडिया को कोई भी निर्देश देने से इंकार कर दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह मामला कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- न्यायिक स्वतंत्रता का सवाल: किसी जनप्रतिनिधि द्वारा जज से संपर्क करने की कोशिश न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर सकती है।
- आचार संहिता का उल्लंघन: यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जनप्रतिनिधियों के आचरण से जुड़े गंभीर मुद्दे को उजागर करता है।
- प्रशासनिक जवाबदेही: शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना भी प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-4699-2026
