टीकमगढ़ जिले में हुई पंचायत कर्मी की नियुक्ति के विवाद में बड़ा फैसला
2011 में हुई थी नियुक्ति
यह मामला टीकमगढ़ जिले के ग्राम पठा में वर्ष 2011 में हुई पंचायत कर्मी की नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रामगोपाल नायक ने हरीश चंद्र साहू की पंचायत कर्मी के पद पर हुई नियुक्ति पर सवाल उठाये थे। आरोप यह लगाया गया कि हरीश चंद्र साहू ग्राम पठा का निवासी नहीं, बल्कि बड़ा मलेहरा का निवासी है। ऐसे में उसकी पंचायत कर्मी के रूप में नियुक्ति नियमों के खिलाफ है।
एसडीओ, एडिशनल कलेक्टर ने रद्द की थी शिकायत
पठा नहीं बड़ा मलेहरा का निवासी
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार असाटी ने कोर्ट में कहा कि राशन कार्ड और मूल निवासी प्रमाण पत्र से स्पष्ट है कि हरीश चंद्र साहू बड़ा मलेहरा का निवासी है। इसके बावजूद प्रशासन ने इन अहम दस्तावेजों को नजरअंदाज किया। यह पूरी प्रक्रिया अनुचित और नियमों के विपरीत है।
बिना जाँच शिकायत निरस्त करना गलत
Madhya Pradesh High Court ने मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि अधिकारियों ने दस्तावेजों का सही मूल्यांकन नहीं किया। बिना उचित जांच के शिकायत खारिज करना गलत है। प्रशासन का कर्तव्य है कि वह तथ्यों की पूरी जांच करे। कोर्ट ने कहा कि “यदि दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, तो विधिवत जांच कराई जाए।”
मामला वापस एसडीओ के पास भेजा
हाईकोर्ट ने एसडीओ और एडिशनल कलेक्टर के आदेश निरस्त (quash) कर दिए और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए एसडीओ के पास भेजा है। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि दस्तावेजों की सही जांच की जाए। आवश्यक हो तो विस्तृत जांच कराई जाए। पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-12824-2011
