LAW'S VERDICT

CJI को भेजी गई मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत

स्टेट बार काउंसिल चुनाव को लेकर हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष डीके जैन ने भेजी है शिकायत 

जबलपुर। मध्यप्रदेश के सवा लाख वकीलों की शीर्ष संस्था राज्य अधिवक्ता परिषद (State Bar Council) के आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था तक पहुंच गया है। मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन ने इस मुद्दे को सीधे Chief Justice of India (सीजेआई) के समक्ष उठाते हुए हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रारंभिक मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के आरोप

मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन द्वारा भेजी शिकायत में कहा गया है कि जारी की गई प्रारंभिक मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे अधिवक्ताओं के नाम सूची से गायब हैं, जो वर्तमान में सक्रिय रूप से वकालत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, कई दिवंगत अधिवक्ताओं के नाम अब भी मतदाता के रूप में दर्ज पाए गए हैं। इसे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल माना जा रहा है।

शिकायत के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

डीके जैन ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि चुनाव समिति को इन गड़बड़ियों का स्वतः संज्ञान लेकर सुधार करना चाहिए था, लेकिन शिकायत दिए जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस निष्क्रियता को शिकायत में "अवैधानिक" बताया गया है और इसे चुनाव की निष्पक्षता के लिए खतरा माना गया है।

चीफ जस्टिस को कमान सौंपने की मांग

शिकायत में आगे बढ़ते हुए यह मांग भी उठाई गई है कि यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित चुनाव समिति समय पर निष्पक्ष चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया का नियंत्रण मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा को सौंप दिया जाए, ताकि चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हो सके।

कोर्ट परिसरों में पोस्टरबाजी पर भी सवाल

शिकायत में चुनाव नियमों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया है। कोर्ट परिसरों में पोस्टर चिपकाना प्रतिबंधित होने के बावजूद कई उम्मीदवारों द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं। इससे न केवल न्यायालय परिसर की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि चुनाव की पवित्रता पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप 

- मतदाता सूची में नाम गायब और मृत अधिवक्ताओं के नाम शामिल
- शिकायत के बावजूद सुधार न होने के आरोप
- सीजेआई से हस्तक्षेप की मांग
- चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल

CJI के रुख पर टिकी निगाहें 

अब वकीलों की नजरें Chief Justice of India के रुख पर टिकी हैं। यदि इस मामले में शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप होता है, तो न केवल इस चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में बार काउंसिल चुनावों के लिए सख्त मानक भी तय हो सकते हैं।

24 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन 

वहीं, इस मामले में मुख्य चुनाव अधिकारी, रिटायर्ड जस्टिस एसके पालो ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिवक्ताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे 24 मार्च की शाम 4 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि प्राप्त आवेदनों पर विधि अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

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