अशोकनगर जिला सत्र न्यायलय के नायब नाज़िर की याचिका ख़ारिज कर हाईकोर्ट ने कहा-
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अशोकनगर जिला सत्र न्यायलय के पूर्व नायब नाज़िर के खिलाफ जारी चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने कहा है कोर्ट के चपरासी को भरी दोपहर में शौचालय, छत और पानी की टंकी की सफाई कराने की धमकी देने वाले नायब नाजिर के खिलाफ यदि विभागीय जांच चल रही है, तो उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभागीय जांच अंतिम चरण में है और केवल तकनीकी आधार पर इसे रद्द नहीं किया जा सकता।
चपरासी ने लगाए थे प्रताड़ना के आरोप
याचिकाकर्ता यशवंत सिंह धाकड़ फिलहाल सिंगरौली की जिला सत्र न्यायलय में पदस्थ है। उस पर आरोप है कि पूर्व में अशोकनगर जिले की मुंगावली तहसील न्यायालय में नायब नाज़िर के पद पर पदस्थ रहने के दौरान 25 मई 2024 को एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) सुनील कुमार दोनेरिया ने उसके खिलाफ शिकायत दी थी। चपरासी का आरोप था कि याचिकाकर्ता ने उसे अपने निजी कक्ष की सफाई करने के लिए मजबूर किया। इस काम को करने से मना करने पर याचिकाकर्ता ने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अत्यधिक गर्मी में शौचालय, छत और पानी की टंकी की सफाई कराने की धमकी दी। शिकायत के आधार पर पहले याचिकाकर्ता को शो-कॉज नोटिस जारी हुआ, जिसका जवाब देने के बावजूद 06 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी गई। इसी बीच उसका ट्रांसफर मुंगावली से सिंगरौली कर दिया गया।
आरोप में न तारीख न स्थान का जिक्र
शिकायत को निराधार नहीं मान सकते
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि शिकायत में पद के दुरुपयोग और उत्पीड़न के आरोप स्पष्ट रूप से लगाए गए हैं। सिर्फ इसलिए कि शिकायत में गाली के सटीक शब्द या घटना की सटीक तिथि दर्ज नहीं है, शिकायत को निराधार नहीं माना जा सकता। इस स्तर पर आरोपों की सत्यता की जांच करना न्यायालय का कार्य नहीं है। विभागीय जांच अंतिम चरण में है और केवल एक गवाह शेष है। ऐसे में याचिकाकर्ता को दी गई चार्जशीट रद्द नहीं की जा सकती। बेंच ने यहां तक कहा कि रिकॉर्ड में विभागीय जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, इसलिए याचिका निरस्त की जाती है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-3760-2026

Judge syab log bhi apply kare apne upper
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