कर्मचारी के खिलाफ दी गई चार्जशीट निरस्त कर हाईकोर्ट ने दिया फैसला
एलडीसी के पद पर हुई थी नियुक्ति
उस नियम से कार्रवाई जो लागू ही नहीं होते
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीपी सिंह का तर्क था कि चार्जशीट M.P. Civil Services (Classification, Control and Appeal) Rules, 1966 की धारा 14 के तहत जारी की गई, जबकि वे नियम याचिकाकर्ता पर लागू ही नहीं होते। उनकी सेवा शर्तें Madhya Pradesh Panchayat Services (Recruitment and General Conditions of Services) Rules, 1999 से नियंत्रित होती हैं।
किसके पास है अनुशासनात्मक अधिकार?
कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत द्वारा 29 सितम्बर 1998 को की गई थी। 03के मार्च 2000 की अधिसूचना के अनुसार, जिला पंचायत/जनपद पंचायत के वर्ग-III और वर्ग-IV कर्मचारियों के लिए अनुशासनात्मक प्राधिकारी CEO है। बड़ी सजा (Major Penalty) के मामलों में सामान्य प्रशासन समिति सक्षम प्राधिकारी है। ऐसे में कलेक्टर द्वारा जारी चार्जशीट अधिकार क्षेत्र से बाहर पाई गई।
पिछले निर्णय का दिया हवाला
अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा 1 मार्च 2017 को Govind Singh Yadav v. State of M.P. मामले में दिए गए फैसले का \हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि कलेक्टर को पंचायत विभाग के वर्ग-III/IV कर्मचारियों पर मेजर पेनल्टी लगाने का अधिकार नहीं है। राज्य की ओर से Shiv Prasad Uikley v. State of Madhya Pradesh (13.04.2018) के फैसले का उल्लेख किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह मामला उद्यानिकी विभाग से संबंधित था, इसलिए वर्तमान प्रकरण पर लागू नहीं होता। अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ 25 अप्रैल 2013 की चार्जशीट को निरस्त कर दी।
हाईकोर्ट का फैसला देखें WP. No. 4498 of 2013
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