LAW'S VERDICT

मुक्ति वाहन योजना को अमल में लाने क्या कर रही है सरकार?


मप्र हाईकोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव से मांगा जवाब 

जबलपुर। मृतकों के सम्मानजनक परिवहन के लिए शुरू की गई मुक्ति वाहन योजना को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव से जवाब तलब किया है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि याचिका में उठाये गए बिंदुओं का पालन करने क्या कदम उठाये जा रहे हैं। बेंच ने प्रमुख सचिव को 24 मार्च को होने वाली सुनवाई तक  जवाब दाखिल करने कहा है।   

यह जनहित याचिका  भोपाल के रशीद नूर खान की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत 148 निःशुल्क शव वाहन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद, कोई भी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर न होने के कारण यह योजना आम जनता के लिए व्यवहारिक रूप से अनुपयोगी बन गई है।

‘मुक्ति वाहन योजना’

यह योजना लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा शुरू की गई है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों से मृतक के पार्थिव शरीर को उनके निवास तक निःशुल्क पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

याचिका में क्या आपत्ति

याचिकाकर्ता का कहना है कि योजना के लिए कोई समर्पित संपर्क/टोल-फ्री नंबर मौजूद नहीं है। आपात स्थिति में नागरिकों को यह पता ही नहीं चल पाता कि शव वाहन कैसे और कहां से बुक किया जाए। इस कारण शोकाकुल परिजनों को अमानवीय और अपमानजनक तरीकों से शव ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे योजना का मानवीय उद्देश्य ही विफल हो रहा है।

अन्य राज्यों का उदाहरण

याचिका में यह भी बताया गया है कि तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में निःशुल्क शव वाहनों के लिए अलग टोल-फ्री हेल्पलाइन पहले से चालू है। वहां एक केंद्रीकृत व्यवस्था के कारण समन्वय, त्वरित सेवा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाई है। इसके विपरीत मध्यप्रदेश में योजना लॉन्च होने के बावजूद संचार तंत्र के अभाव में सेवा आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही।

हाईकोर्ट से क्या राहत मांगी

जनहित याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि राज्य स्तर पर केंद्रीकृत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्थापित करने के निर्देश दिए जाएं। शव वाहनों की बुकिंग और समन्वय के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना वास्तव में सम्मानजनक, समयबद्ध और सुलभ सेवा बन सके।

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