LAW'S VERDICT

3 दिन में सुधारो रेवेन्यू रिकॉर्ड, वरना हाजिर हों कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह


अवमानना मामले पर हाईकोर्ट ने दी अफसरों को आखिरी मोहलत 

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वर्ष 2010 की रिट याचिका में पारित आदेश का अब तक पालन न होने पर दायर अवमानना याचिका में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस डीडी बंसल की कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 7 अक्टूबर 2023 को पारित हुए राजस्व रिकॉर्ड को सुधारने के आदेश का तीन दिन के भीतर पालन किया जाए, अन्यथा कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह और एडिशनल कलेक्टर हरेंद्र नारायण को हाजिर होकर जवाब देना होगा। मामले पर अगली सुनवाई सोमवार 9 फरवरी को होगी।

क्या था मूल आदेश?

भोपाल के बरखेड़ा पठानी में रहने वाले पंडित पाटिल, रविंद्र पाटिल,  सुशीला पाटिल और कोकिला पाटिल ने यह अवमानना याचिका दाखिल की गई है। आवेदकों का कहना है कि खसरा नंबर 399/2 के राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधारने को लेकर एक रिट याचिका वर्ष 2010 में  दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने 07 अक्टूबर 2023 को भोपाल के अतिरिक्त कलेक्टर/कलेक्टर/प्राधिकृत प्राधिकारी को 60 दिनों के भीतर राजस्व अभिलेख (रेवेन्यू रिकॉर्ड) में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि उक्त आदेश का पालन अब तक नहीं किया गया, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर की गई।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला खारिज हुआ 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी ने अदालत को बताया कि संबंधित हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय से  21 जनवरी 2026 को वह याचिका खारिज हो चुकी है। ऐसे में अब हाईकोर्ट के आदेश के पालन में कोई कानूनी बाधा शेष नहीं है।

कोर्ट से माँगा 2 सप्ताह का समय 

प्रतिवादी कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह और एडिशलन कलेक्टर हरेंद्र नारायण की ओर से कहा गया कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए  आदेश का पालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाए।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अनावेदकों की ओर से दी गई दलील अस्वीकार करते हुए कहा कि 21 जनवरी 2026 का डिजिटल हस्ताक्षरित ई-ऑर्डर इंटरनेट पर उपलब्ध है। ऐसे में सर्टिफाइड कॉपी का इंतजार अनुपालन में देरी का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया  07 अक्टूबर 2023 के आदेश का तीन दिन में पालन किया जाए। आदेश का पालन न होने की स्थिति में संबंधित दोनों अधिकारी अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  CONC-1221-2024

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