हाईकोर्ट ने जवाब देने रज्जाक के वकील को दिया समय, अब सुनवाई 16 को
जबलपुर। जबलपुर के कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल रज्जाक की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नया मोड़ आ गया। राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि जब हिरासत का आधार ही याचिका में स्पष्ट नहीं है, तो उसे चुनौती कैसे दी जा सकती है। मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वानी की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई।
सरकार का तर्क: पहले पत्नी की याचिका वापस, अब नई चुनौती क्यों?
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि रज्जाक की पत्नी सुबीना बेगम ने पहले हिरासत के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसे 8 जुलाई 2025 को वापस ले लिया गया था। अब जबकि हिरासत का ठोस आधार याचिका में उल्लेखित नहीं है, यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि रज्जाक को यदि राहत चाहिए तो उसे जमानत अर्जी दाखिल करनी चाहिए, न कि इस प्रकार की याचिका।
विधायक संजय पाठक ने आरोपों को नकारा
गौरतलब है कि रज्जाक ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते एनएसए के तहत की गई कार्रवाई पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौजूदा विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक के इशारे पर हुई। हाईकोर्ट के निर्देश पर 31 अक्टूबर को विधायक का नाम सार्वजनिक होने के बाद बेंच ने उन्हें नोटिस जारी किया था। हालांकि विधायक ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका इस कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है।
वकीलों को मिला समय, 16 मार्च को अगली सुनवाई
सरकार की आपत्ति पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अली और अधिवक्ता शारिक अकील फारुकी ने जवाब देने के लिए समय मांगा। डिवीजन बेंच ने 16 मार्च को अगली सुनवाई तय करते हुए मामले को स्थगित कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-27476-2025
