
ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा पर आघात का आरोप
परिवादी पं. वैभव पाठक की ओर से दायर परिवाद में कहा गया है कि फिल्म का शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ ब्राह्मण समुदाय की सामूहिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है। याचिका में तर्क दिया गया कि ‘पंडित/पंडत’ शब्द ज्ञान, संस्कार और धार्मिक मर्यादा का प्रतीक है। इसे ‘घूसखोर’ जैसे आपराधिक विशेषण के साथ जोड़ना पूरे समुदाय को भ्रष्टाचार से जोड़ने जैसा है। परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि फिल्म के शीर्षक का सोशल मीडिया, अखबारों और ट्रेलरों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, जिससे कथित रूप से समुदाय की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची है। इसे सामाजिक मानहानि का मामला बताया गया है।
अदालत ने मांगा जवाब
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान परिवादी के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, पंकज तिवारी, प्रशांत सिरमोलिया, विनीत टेहनगुरिया, रितेश शर्मा, शुभम पाटकर और अरविन्द सिंह चौहान उपस्थित रहे। अब मामले में अगली सुनवाई की तारीख पर अनावेदकों का पक्ष सामने आएगा, जिसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।