हाईकोर्ट ने कहा कार्रवाई से पहले सुनवाई और मुआवज़े की प्रक्रिया जरूरी
इंदौर। उज्जैन में संदिपनी चौराहे से उद्दियन रोड तक सड़क चौड़ीकरण के लिए एक मकान और दुकान को तोड़ने पर मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सशर्त रोक लगा दी है। यह कार्रवाई बिना नोटिस और बिना मुआवजा दिए की जा रही थी। जस्टिस प्रणय वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा है कि इस कार्रवाई के खिलाफ याचिकाकर्ता 7 दिनों के भीतर उज्जैन नगर निगम आयुक्त को अपना आवेदन दें और उसका निराकरण अगले तीन सप्ताह के भीतर किया जाए। आवेदन पर आयुक्त का फैसला आने तक याचिकाकर्ता के मकान और दुकानको गिराने की कार्रवाई नहीं हो सकेगी।
क्या था मामला
उज्जैन के अग्रसेन नगर में रहने वाले राकेश रैकवार की ओर से यह याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि संदिपनी चौराहे से उद्दियन रोड को चौड़ा करने उनके रिहायशी मकान पर मार्किंग कर दी गई और बिना किसी पूर्व नोटिस या सुनवाई के ध्वस्तीकरण की तैयारी की जा रही है। याचिकाकर्ता का दावा था कि यह सड़क पहले से लगभग 60 फीट चौड़ी है, ऐसे में अतिरिक्त चौड़ीकरण की आवश्यकता संदिग्ध है। उनका दावा था कि इस मार्ग का सीधा संबंध उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र से नहीं है और वहां के लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध है, ऐसे में प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई अनुचित है।
बिना अधिग्रहण कार्रवाई गलत
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील आदित्य प्रताप सिंह सेंगर ने दलील दी कि संबंधित दुकान/मकान निजी भूमि पर स्थित है और बिना भूमि अधिग्रहण तथा उचित मुआवज़ा दिए ध्वस्तीकरण की तैयारी की जा रही है, जो कानून के विरुद्ध है। इस पक्ष के समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट के एक पूर्व आदेश और समान प्रकृति के एक हालिया आदेश का हवाला भी दिया गया।
हाईकोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सात दिनों के भीतर उज्जैन नगर निगम आयुक्त के समक्ष विस्तृत आपत्ति/प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने की छूट दी है। साथ ही निर्देश दिया कि यदि समय-सीमा के भीतर आपत्ति दी जाती है, तो आयुक्त तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार कारणयुक्त (reasoned) और स्पीकिंग ऑर्डर पारित करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक याचिकाकर्ता की आपत्ति पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक दुकान/मकान का ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा। यदि निर्णय याचिकाकर्ता के विरुद्ध जाता है, तो उसे कानूनी उपाय अपनाने के लिए 10 दिन का समय (breathing time) दिया जाएगा।
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