LAW'S VERDICT

दुष्कर्म पीड़िता को जमीन खा गई या आसमान निगल गया...



हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती: पीड़िता नहीं मिली तो रतिबढ़ थाने के SHO रहें हाजिर 

जबलपुर। बलात्कार से जुड़े एक आपराधिक अपील मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि पीड़िता और उसके माता-पिता का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि न तो पीड़िता ट्रेस हो सकी है और न ही उसके माता-पिता का कोई सुराग मिला है। इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताते गए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने तल्ख़  टिप्पणी करके कहा की पीड़िता को जमीन खा गई या आसमान निगल गया। बेंच ने कहा है कि  बैंक लेन-देन और आधार कार्ड मूवमेंट के आधार पर पीड़िता को खोजा जाए। इन दो उपायों के अलावा भी पुलिस कोई और उपाय की मदद ले सकती है। इसके बाद भी यदि पीड़िता को नोटिस तामील नहीं होता तो  जनवरी के अंतिम सप्ताह में होने वाली सुनवाई पर भोपाल के रातीबढ़ थाने के SHO को हाजिर होना पड़ेगा।

डिवीज़न बेंच ने ये निर्देश रातीबढ़ थाने के सिद्धि विनायक कॉलोनी में रहने वाले छोटू सिंह मरावी की ओर से वर्ष 2019 में दाखिल अपील पर दिए। दरअसल, छोटू पर आरोप है कि 27 अप्रैल 2018 की रात को उसने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया है। भोपाल की जिला सत्र न्यायालय ने 12 फरवरी 2019 को आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देकर दाखिल हुई अपील पर 4 जुलाई 2025 को पीड़िता को नोटिस जारी किये गए थे। 

5 पेशियां टलीं, फिर भी नोटिस तामील नहीं 

इस मामले पर 4 जुलाई को  नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट में 5 पेशियाँ हुईं, लेकिन पीड़िता को तामील नहीं हुए। सरकार की ओर से कहा गया- ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता और उसके माता-पिता रोजगार की तलाश में अपने गृह नगर से बाहर कहीं रह रहे हैं। इस पर अदालत ने पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पीड़िता की तलाश के लिए सभी प्रभावी और वैधानिक उपाय अपनाए जाएं।

बैंक ट्रांजेक्शन और आधार मूवमेंट से तलाश के निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता और उसके माता-पिता को खोजने के लिए उनके बैंक लेन-देन और आधार कार्ड मूवमेंट की जांच की जाए। इसके साथ-साथ पुलिस को यह भी छूट दी गई है कि वह अन्य सभी संभावित तरीकों को भी अपनाए। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता के रिश्तेदारों से पूछताछ कर उसके वर्तमान ठिकाने की जानकारी जुटाई जाए।

SHO को दी सख्त चेतावनी

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अगली सुनवाई तक पीड़िता को नोटिस तामील नहीं कराया जाता या उसका पता नहीं लगाया जाता, तो Ratibarh Police Station के संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहना होगा।

 CRA-3276-2019

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