मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदेश के हजारों न्यायिक कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यायिक कर्मचारियों को कम वेतन देने और बाद में रिकवरी करने के मामलों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। एक साथ दायर तीन रिट याचिकाओं का निपटारा करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीज़न बेंच ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारियों से नियमित कार्य लिया जा रहा है, तो प्रोबेशन के नाम पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर कम वेतन देना ‘Equal Pay for Equal Work’ के सिद्धांत के खिलाफ है। हाईकोर्ट के इस फैसले का लाभ प्रदेश में काम कर रहे हजारों न्यायिक कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।
क्या था विवाद?
इंदौर जिला अदालत में कोर्ट मैनेजर के रूप में काम कर रहे वसीम अकरम बी अन्य की ओर से ये 3 याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गईं थीं। इन मामलों में याचिकाकर्ताओं ने 06.10.2020, 22.03.2021, 06.04.2021, 13.05.2021, 16.04.2021, 20.04.2021 और 30.04.2021 को पारित आदेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 12.12.2019 के परिपत्र के आधार पर मासिक वेतन से रिकवरी शुरू की गई थी।
इस परिपत्र में प्रोबेशन के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में क्रमशः 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, कई कर्मचारियों को शुरू में पूरा वेतन दिया गया और बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, जबकि कुछ को कम वेतन मिला। बाद में परिपत्र लागू करते हुए जिला न्यायालयों ने रिकवरी के आदेश पारित कर दिए।
पहले भी मिल चुकी है राहत
कोर्ट ने कहा कि इसी परिपत्र पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। State of Madhya Pradesh बनाम Dilliraj Bhilala (W.A. No.1498/2024, दिनांक 28.04.2025) में समन्वय पीठ ने इस परिपत्र को अतार्किक बताते हुए लगभग निरस्त कर दिया था। वहीं Indore Municipal Corporation बनाम Vinita Tiwari (W.A. No.2977/2025, 31.10.2025) में भी यही रुख अपनाया गया और अपील खारिज कर दी गई।
अन्य हाईकोर्ट का भी समर्थन
इसी तरह का फैसला High Court of Chhattisgarh ने भी WPS No.6436/2021 (19.11.2025) में अमृत लाल साहू व अन्य बनाम राज्य छत्तीसगढ़ मामले में दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला
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सभी रिकवरी आदेश और की गई वसूली रद्द।
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जिन कर्मचारियों से राशि वसूल की गई है, वह वापस की जाए।
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जिन कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में 100% वेतन नहीं मिला, उन्हें उस अवधि का पूरा वेतन दिया जाए।
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