जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, 23 मार्च को सुनवाई
जबलपुर | मप्र हाईकोर्ट ने राज्य में दिव्यांगजनों को दी जा रही महज 600 रुपये मासिक पेंशन पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि यह राशि न तो सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त है और न ही संवैधानिक सामाजिक सुरक्षा की भावना के अनुरूप। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने एक दिव्यांग द्वारा दायर याचिका को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार व अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
याचिका में क्या कहा गया है?
कटनी निवासी दिव्यांग प्रदीप कुमार रजक की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वे डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में विधि के छात्र हैं। राज्य सरकार द्वारा दी जा रही 600 रुपये मासिक पेंशन न तो इलाज के लिए पर्याप्त है और न ही न्यूनतम जीवन-यापन संभव बनाती है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नीति दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-24 का खुला उल्लंघन है।
पहले के आदेश की भी अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 30 दिसंबर 2024 को मप्र हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में शासन के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए थे, लेकिन न तो वह प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया और न ही दिव्यांग संगठनों द्वारा दिए गए ज्ञापनों व विरोध-प्रदर्शनों पर कोई सुनवाई हुई। इसका असर प्रदेश के करीब 15 लाख दिव्यांगजनों पर पड़ रहा है, जो इस “अन्यायपूर्ण पेंशन नीति” से प्रभावित हैं।
ताकि सम्मान से जी सकें दिव्यांग
याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि राज्य सरकार को दिव्यांग पेंशन में यथोचित बढ़ोतरी के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि दिव्यांगजनों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सके।
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